आपसी मुहब्बत की मिसाल है सय्यद नय्यर
शहर बनारस की शायद ही कोई ऐसी गली होगी जहा ऐसी सांझी विरासत की मिसाल न हो। इसी सांझी विरासत की एक मिसाल है सय्यद नय्यर। वाराणसी के चेतगंज थाना क्षेत्र स्थित काली महल पर रहने वाले सय्यद नय्यर एक ऐसी शख्सियत है जिनको देख कर हर नफरत मुहब्बत से अपने सर को झुका लेती है। सय्यद नय्यर पहनावे में सफ़ेद कुर्ता पैजामा पहनना पसंद करते है। सर पर हरा गमछा हमेशा ही रहता है। आँखों पर चश्मा, और चेहरे पर मुहब्बत का तेज।
15 वर्षो से करवाते है दुर्गापूजा
काली महल स्थित दुर्गापूजा समिति लिटिल स्टार
क्लब के सय्यद नय्यर पिछले 15 वर्षो से कार्यकारी अध्यक्ष है। समिति के अध्यक्ष
राजकुमार यादव उर्फ़ राजू यादव है। मगर राजकुमार यादव उर्फ़ राजू यादव सय्यद नय्यर
के बिना क्लब का कोई कार्य नही करते है।
विगत 15 वर्षो से अधिक समय से सय्यद नय्यर राजू यादव के साथ जाते है,
दुर्गा प्रतिमा पसंद करने में मुख्य भूमिका निभाते है। जिस प्रतिमा को सय्यद नय्यर
पसंद करते है, पंडाल में वही प्रतिमा स्थापित होती है। मूर्तियों के बारे में
बढ़िया जानकारी रखने वाले सय्यद नय्यर के सम्बन्ध में एक संस्मरण हँसते हुवे
राजकुमार यादव बताते है।
राज कुमार यादव उर्फ़ राजू यादव बताते है कि एक
वर्ष कई प्रतिमा बनाने वालो के यहाँ हम लोग गए मगर नय्यर भाई को प्रतिमा पसंद नही
आ रही थी। एक वेस्ट बंगला के कारीगर के पास हम लोग जाते है। नय्यर भाई उसको
प्रतिमाओं के समबन्ध में जब बताना शुरू करते है तो वह उनको ब्राह्मण समझने लगते है।
चलते समय जब बिल पर नय्यर भाई ने हस्ताक्षर किये तो वह मूर्तिकार बड़े अचम्भे से
उनका नाम पूछते है। नय्यर भाई जब नाम बताते है तो उनको काफी देर तक यकीन ही नही
आता है कि एक मुस्लिम समाज से होकर मूर्ति के सम्बन्ध में इतनी गहरी जानकारी कैसे
है।
वही सय्यद नय्यर का कहना है कि उम्र गुज़र गई, कभी
अहसास ही नही हुआ कि कौन मुस्लिम कौन हिन्दू, कौन मुस्लिम। हम लोग हमेशा मिली जुली
आबादी में रहे। एक साथ खेले बड़े हुवे। आज भी एक दुसरे के त्योहारों में शिरकत करते
है। खुद ही प्रतिमा विसर्जन के समय मैं आगे आगे जुलूस के चलता हु। ऐसा नही कि उस
दिन कुछ अलग पहनावा हो मेरा। वही कुरता पैजामा रहता है। बचपन से ही दोस्ती जगन्नाथ
मूर्ति भण्डार में रही। पारिवारिक ताल्लुकात रहे। तो मूर्ति के बारे में चाचा
बताया करते थे। उसी जानकारी का उपयोग करते है।
नवरात्र के 9 दिन बैठते है जगन्नाथ मूर्ति भण्डार
पर
दोस्ती के खातिर नय्यर मियाँ नवरात्र के पुरे 9
दिन जगन्नाथ मूर्ति भण्डार पर मूर्तियों की बिक्री हेतु बैठते है। आने वाले
ग्राहकों को मूर्ति दिखाना, उनके सम्बन्ध में बताना और ग्राहकों का सेवा सत्कार
करना उनके मामूर में पिछले 30 वर्षो से है। हमारी बात दूकान के मालिक संजय से हुई।
संजय ने बताया कि नय्यर भाई हमारे बड़े भाई है। हम लोगो को कभी महसूस नही हुआ कि
नय्यर भाई का मज़हब क्या है। हम सब एक साथ रहते है। हमारे घर के हर एक उत्सव में
नय्यर भाई की शिरकत रहती है। जबकि नय्यर भाई के यहाँ हर एक उत्सव में हमारा परिवार
जाता है।
हमारे देश मे कई जगहों पर हिन्दू मुसलमान दोनों मिलकर दुर्गा पूजा में शामिल रहते हैं।
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